Wednesday, 28 March 2012

नहीं चला एजेंट विनोद का जादू


 एजेंट विनोद बॉक्स ऑफिस पर धमाल नहीं मचा पाई। सैफ और करीना ने इस फिल्म को हिट कराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन दर्शकों ने इस फिल्म को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया।बॉक्स ऑफिस एक्सपर्ट अमोद मेहरा की मानें तो सैफ की ये फिल्म कुल लागत ही वसूल कर ले तो काफी होगा। फिल्म समीक्षकों की मानें तो फिल्म में कुछ ज्यादा ही क्लाइमेक्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे दर्शक कंफ्यूज हो गए और फिर उनके लिए यह फिल्म बोरिंग बन गई।इस फिल्म को बनाने में करीब 65 करोड़ रुपये की लागत आई।मेहरा का कहना है कि फिल्म लागत के आंकड़े को भी नहीं छू पाएगी।रिलीज से तीन दिन बाद तक एजेंट विनोद महज 27.5 करोड़ रुपये जुटा पाई। फिल्म के सैटेलाइट राइट भी 15 करोड़ में बिके जबकि देश से बाहर की कलेक्शन सामान्य रहा। 

फेसबुक पर बन रही है कहानी


फेसबुक पर बन रही है नयी से नयी कहानी  क्रिएटिव डायरेक्टर उप्पुतुरु ने कहा, ‘जब तक कोई कहानी में एक पैरा या वाक्य नहीं जोड़ता तब तक कहानी और उसके पात्र जस के तस रहते हैं. उसके बाद अगला लेखक अपनी कल्पनाएं उड़ेलता है. इनमें से कोई भी लेखक नहीं जानता कि कहानी में आगे क्या होगा.’
दिल्ली में काम कर रहे उप्पुतुरु ने फेसबुक पर मार्च में ‘पीपुल लाइक यू एंड मी’ पेज बनाया और अपनी अनोखी किताब के पहले तीन पैरे लिखे, जिसे उन्होंने ‘वन्स’ नाम दिया है.
उन्होंने साइट पर मौजूद अन्य मित्रों को कहानी पर आगे पोस्ट डालकर रचनात्मकता दिखाने का निमंत्रण दिया.
कहानी को सैकड़ों पाठक मिल गये हैं और अभी इसे लिखा जा रहा है. ऑनलाइन यह विचार लोकप्रिय हो गया है. करीब 30 लोग कहानी में योगदान दे चुके हैं, जिनमें से कुछ तो नियमित लेखक हैं.
कहानी को आगे बढ़ाने वाले कुछ नेटिजन तो छात्र और विदेशी नागरिक भी हैं. ब्रिटेन के विवादास्पद विज्ञापन पेशेवर नील फ्रेंच भी इनमें शामिल हैं. स्पेन की पृष्ठभूमि पर लिखी जा रही कहानी के अंदाज को लेकर हर लेखक की अपनी कल्पना है इसलिए यह उपन्यास एक अलग ही रूप ले सकता है.
उप्पुतुरु का कहना है, ‘यह देखने के लिए प्रयोग किया गया है कि क्या हम उन लोगों की मदद से कुछ कर सकते हैं जो एक दूसरे को जानते तक नहीं. मैं कोई बहुत अच्छी तरह लिखी कहानी बनाने की कोशिश नहीं कर रहा. मैं ऐसी कहानी लिखने की कोशिश कर रहा हूं जिसमें अलग अलग लोगों के विचार हों, जो आम आदमी हों ना कि सलमान रश्दी या चेतन भगत हों.’ हालांकि कहानी लिखने के कुछ नियम भी तय किये गये हैं, जिसे पुस्तक में भूमिका निभाने वाले लेखक को अपनाना होगा.फेसबुक